दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ को लेकर पंजाब में नया विवाद और समर्थन देखने को मिल रहा है। ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटाए जाने के बाद फिल्म को लेकर लोगों की उत्सुकता बढ़ गई है। गुरदासपुर के गांव मांनचोपड़ा में ग्रामीणों के लिए फिल्म की स्क्रीनिंग की गई। इसके बाद पठानकोट के कई गुरुद्वारों ने भी विशेष स्क्रीनिंग आयोजित करने का फैसला लिया है। गुरुद्वारा प्रबंधकों के अनुसार फिल्म देखने के लिए संगत और युवाओं में काफी उत्साह है। भारतीय किसान यूनियन चढूनी के पंजाब युवा अध्यक्ष ने कहा कि फिल्म को गांव-गांव तक पहुंचाने की शुरुआत की गई है। गुरुद्वारा प्रबंधकों का कहना है कि फिल्म मानवाधिकार कार्यकर्ता भाई जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन और संघर्ष पर आधारित है। उन्होंने आरोप लगाया कि फिल्म को रोकना इतिहास को दबाने का प्रयास है। दिल्ली सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी ने भी फिल्म पर लगी रोक का विरोध किया है। कमेटी ने फिल्म की सार्वजनिक स्क्रीनिंग और खालड़ा के जीवन पर शैक्षणिक कार्यक्रम आयोजित करने की घोषणा की है। फिल्म रिलीज के दो दिन बाद ही ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटा दी गई थी, जिसके बाद विवाद बढ़ गया। दिलजीत दोसांझ ने भी फिल्म हटाए जाने पर निराशा जताई थी और लोगों से इसे साझा करने की अपील की थी।
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