वैज्ञानिकों के अनुसार अंटार्कटिका आर्कटिक की तुलना में लगभग 25 मिलियन वर्ष पहले जम गया था। नई रिसर्च में संकेत मिले हैं कि इसका कारण सिर्फ जलवायु परिवर्तन नहीं बल्कि महाद्वीप के नीचे छिपी भू-वैज्ञानिक प्रक्रियाएं भी थीं। शोधकर्ताओं का मानना है कि अंटार्कटिका के नीचे मौजूद संरचनाओं और समुद्री धाराओं ने बर्फ बनने की प्रक्रिया को तेज किया। इस बदलाव ने धीरे-धीरे पूरे महाद्वीप को स्थायी रूप से बर्फ से ढक दिया। अध्ययन से पता चलता है कि पृथ्वी के ध्रुवीय क्षेत्रों का विकास अलग-अलग समय पर हुआ। वैज्ञानिकों ने इस खोज को जलवायु इतिहास को समझने में अहम माना है। यह शोध भविष्य में जलवायु मॉडलिंग को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह जानकारी पृथ्वी के पुराने वातावरण को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे यह भी पता चलता है कि छोटे भू-वैज्ञानिक बदलाव बड़े जलवायु परिवर्तन का कारण बन सकते हैं। यह अध्ययन पृथ्वी विज्ञान के क्षेत्र में नई दिशा प्रदान करता है।
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