जाने-माने थिएटर दिग्गज और कश्मीरी पंडित एम.के. रैना ने अपने जीवन के संघर्षों और कला के प्रति समर्पण को साझा किया है। नोएडा स्थित अपने घर में सुकून ढूंढने वाले रैना स्वीकार करते हैं कि श्रीनगर में अपने पैतृक घर को खोने का दर्द आज भी उनके मन में जीवित है। उनकी कलात्मक यात्रा की शुरुआत शुरुआती थिएटर अनुभवों से हुई, जिसने उन्हें अभिनय की गहराई सिखाई। ’27 डाउन’ फिल्म में उनकी प्रभावशाली भूमिका ने सिनेमा जगत में उनकी एक अलग पहचान स्थापित की। वे लंबे समय से समानांतर सिनेमा (पैरेलल सिनेमा) और थिएटर सक्रियता के लिए पूरी तरह समर्पित रहे हैं। रैना का मानना है कि दिल्ली शहर ने उन्हें जीवन में आगे बढ़ने के लिए न केवल जगह दी, बल्कि विपरीत परिस्थितियों से लड़ने का साहस भी प्रदान किया। उनकी पूरी यात्रा कला के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। वे आज भी पूरी निष्ठा के साथ थिएटर और रचनात्मक कार्यों में सक्रिय हैं। उनका यह सफर उन तमाम कलाकारों के लिए प्रेरणा है जो अपनी जड़ों से जुड़े रहकर कला की सेवा करना चाहते हैं।
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