फिल्मकार भाग्यराज ने भारतीय सिनेमा में पैन-इंडिया फिल्मों की अवधारणा को काफी पहले ही आगे बढ़ाया। उन्होंने कई सफल तमिल फिल्मों को हिंदी में रूपांतरित कर नई पहचान बनाई। उनकी फिल्मों ने दक्षिण और हिंदी सिनेमा के बीच मजबूत सेतु का काम किया। अमिताभ बच्चन के साथ उनकी फिल्म ‘आख़िरी रास्ता’ को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जाता है। इस फिल्म के हिंदी संस्करण में भावनात्मक गहराई बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया गया। बताया जाता है कि अमिताभ बच्चन ने भी फिल्म की प्रस्तुति को प्रभावी बनाने में योगदान दिया। कपूर परिवार ने भी भाग्यराज के काम की सराहना की और उन्हें सम्मान दिया। बोनी कपूर ने उनसे मुलाकात की व्यवस्था कर उनके प्रति आभार जताया। भाग्यराज के निर्देशन का प्रभाव बाद की कई हिंदी फिल्मों में देखा गया। ‘बेटा’ और ‘मिस्टर बेचारा’ जैसी फिल्मों में उनकी शैली की झलक मिलती है। उनके योगदान ने रीमेक फिल्मों की परंपरा को मजबूत करने में मदद की। फिल्म उद्योग में उन्हें एक दूरदर्शी निर्माता-निर्देशक के रूप में देखा जाता है जिसने पैन-इंडिया सिनेमा को नई दिशा दी।
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