बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि यदि किसी महिला को उत्पीड़न और उपेक्षा के कारण अलग रहना पड़ता है, तो उसे भरण-पोषण से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में पत्नी का वित्तीय सहायता का अधिकार बना रहता है। यह टिप्पणी एक ऐसे मामले की सुनवाई के दौरान आई जिसमें महिला ने घरेलू हिंसा और प्रताड़ना के आधार पर अलग रहने का फैसला किया था। कोर्ट ने माना कि विवाह में क्रूरता साबित होने पर महिला की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करना आवश्यक है। फैसले में कहा गया कि तलाक की प्रक्रिया या अलगाव के बावजूद पत्नी के अधिकार समाप्त नहीं होते। अदालत ने यह भी माना कि भरण-पोषण का उद्देश्य जीवन की बुनियादी जरूरतों को पूरा करना है। इस निर्णय को महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों ने इसे पारिवारिक कानून में अहम मिसाल बताया है। मामले ने वैवाहिक विवादों में आर्थिक सुरक्षा के मुद्दे को फिर से चर्चा में ला दिया है।
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