मुंबई के अस्पतालों में मानवता और साहस का एक अद्भुत उदाहरण देखने को मिला है। दो महिलाओं को डॉक्टरों द्वारा ब्रेन डेड घोषित किए जाने के बाद, उनके परिवारों ने एक अत्यंत सराहनीय निर्णय लिया। शोक में डूबे होने के बावजूद, परिजनों ने दोनों महिलाओं के अंगों को दान करने की सहमति दी। इस नेक कदम से आठ जरूरतमंद मरीजों को नया जीवनदान मिला है। डॉक्टरों के अनुसार, दान किए गए अंगों में हृदय, गुर्दे, लिवर और आंखों का सफलतापूर्वक प्रत्यारोपण किया गया है। यह जटिल प्रक्रिया कई अस्पतालों के आपसी समन्वय से संभव हो सकी। मुंबई के चिकित्सा जगत में इस घटना की व्यापक सराहना हो रही है। अंगदान के महत्व को समझाने और लोगों को प्रेरित करने के लिए यह एक बहुत बड़ा संदेश है। प्रत्यारोपण के बाद सभी आठों मरीज फिलहाल स्थिर बताए जा रहे हैं और उनकी रिकवरी पर डॉक्टरों की कड़ी नजर है। अंगों के सही समय पर मिलने से उन मरीजों के परिवारों में खुशी की लहर है जो लंबे समय से अंग प्रत्यारोपण का इंतजार कर रहे थे। दोनों महिलाओं के परिवार का यह त्याग आने वाले समय में अन्य लोगों को भी अंगदान के लिए प्रोत्साहित करेगा। चिकित्सा विशेषज्ञों ने कहा है कि अंगदान ही किसी व्यक्ति को मृत्यु के बाद भी जीवित रखने का सबसे अच्छा तरीका है।
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