संपादक नीरू मिश्रा द्वारा संपादित एक नई पुस्तक में रामायण और महाभारत की विभिन्न परंपराओं, व्याख्याओं और सांस्कृतिक प्रभावों का विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत किया गया है। चौदह विद्वानों के निबंधों से सुसज्जित यह पुस्तक बताती है कि ये दोनों महाकाव्य केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि कला, साहित्य, इतिहास और समाज पर गहरा प्रभाव डालने वाली सांस्कृतिक धरोहर भी हैं। पुस्तक में लघु चित्रकला, सजावटी कला, बौद्ध और जैन परंपराओं में इन महाकाव्यों के पुनर्कथन, दक्षिण-पूर्व एशिया में उनके रूपांतरण, क्षेत्रीय रंगमंच, पवित्र भूगोल, लैंगिक विमर्श तथा प्रमुख पात्रों के नैतिक और मनोवैज्ञानिक पक्षों पर विस्तार से चर्चा की गई है। यह संकलन दर्शाता है कि रामायण और महाभारत समय, भाषा और संस्कृति की सीमाओं से परे जाकर विभिन्न समाजों में अलग-अलग रूपों में जीवंत रहे हैं और आज भी अध्ययन तथा विमर्श का महत्वपूर्ण विषय बने हुए हैं।
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