एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, 2030 तक भारत की लगभग 90% नियोजित नवीकरणीय ऊर्जा (renewable energy) अवसंरचना गंभीर जलवायु चुनौतियों का सामना कर सकती है, जिससे 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति खतरे में पड़ सकती है। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि यदि आज ही इन परियोजनाओं की सुरक्षा और मजबूती (climate-proofing) के लिए कुल निवेश का केवल 2% हिस्सा खर्च किया जाए, तो भविष्य में 28 अरब डॉलर के संभावित नुकसान को टाला जा सकता है। हालांकि महाराष्ट्र जैसे कुछ क्षेत्र तुलनात्मक रूप से कम जोखिम में हैं, लेकिन भारत के तटीय क्षेत्रों में बढ़ते खतरों और ऊर्जा की बढ़ती मांग को देखते हुए स्वच्छ ऊर्जा के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए तत्काल ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। यह रणनीतिक निवेश न केवल परिसंपत्तियों की रक्षा करेगा बल्कि भारत के हरित ऊर्जा लक्ष्यों की स्थिरता सुनिश्चित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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