मंगला कपूर की जिंदगी 12 साल की उम्र में हुए एक दर्दनाक एसिड अटैक के बाद पूरी तरह बदल गई। इस हमले के बाद उन्हें लंबे समय तक कई मुश्किलों और इलाजों से गुजरना पड़ा। अब तक वह 37 सर्जरी करवा चुकी हैं। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और शास्त्रीय संगीत को अपनी ताकत बनाया। संगीत ने उन्हें नई पहचान और आत्मविश्वास दिया। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कीं। मंगला कपूर ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में अध्यापन कार्य किया। उनकी मेहनत और लगन ने उन्हें समाज में एक सम्मानजनक स्थान दिलाया। हाल ही में उन्हें पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया है। यह सम्मान उनके संघर्ष और उपलब्धियों की पहचान माना जा रहा है। उनकी कहानी दृढ़ इच्छाशक्ति और आत्मबल का उदाहरण है। उन्होंने अपने दर्द को ताकत बनाकर एक नई पहचान स्थापित की। आज वे कई लोगों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं।
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