सिंगरौली में करोड़ों रुपये के कथित शिक्षा घोटाले और वित्तीय अनियमितताओं के मामले को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। लोकायुक्त जांच और एफआईआर दर्ज होने के बावजूद पूर्व प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) की नई तैनाती पर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि गंभीर आरोपों के बावजूद अधिकारी को जिम्मेदारी दी गई, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था पर उंगलियां उठ रही हैं। मामले ने स्थानीय स्तर पर राजनीतिक और प्रशासनिक बहस को जन्म दे दिया है। शिक्षा विभाग में हुई कथित अनियमितताओं की जांच पहले से ही जारी है। शिकायतों के अनुसार, करोड़ों रुपये के फंड के उपयोग में गड़बड़ी के आरोप लगाए गए हैं। एफआईआर दर्ज होने के बाद भी नई पोस्टिंग मिलने से कई संगठनों में नाराजगी है। विरोधियों का कहना है कि यह निर्णय पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है। प्रशासन की ओर से अभी तक इस पर विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। मामले से जुड़े दस्तावेजों और जांच रिपोर्ट की समीक्षा जारी है। आगे की कार्रवाई जांच निष्कर्षों के आधार पर तय की जाएगी।
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