बालोद जिले में खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही धान की बुवाई पर मानसून की बेरुखी का असर साफ दिखने लगा है। जून के 21 दिन बीत जाने के बाद भी जिले के पांचों ब्लॉकों में निर्धारित लक्ष्य 1,77,400 हेक्टेयर के मुकाबले मात्र 2,319 हेक्टेयर रकबे में ही धान की बुवाई हो पाई है। कृषि विभाग के अनुसार, पर्याप्त बारिश न होने से खेतों में मिट्टी की नमी कम है, जिससे किसानों को जुताई और बुवाई करने में भारी कठिनाई हो रही है। फिलहाल, कई किसान सीड ड्रिल पद्धति का सहारा ले रहे हैं। हालांकि, विभाग का मानना है कि मानसून में देरी के बावजूद अगस्त तक लक्ष्य को हासिल कर लिया जाएगा। बालोद जिला बनने के बाद से हर साल 1.75 लाख हेक्टेयर से अधिक रकबे में धान की खेती का रिकॉर्ड रहा है। विभाग के उप संचालक आशीष चंद्राकर ने बताया कि गुंडरदेही और डौंडीलोहारा ब्लॉक में सर्वाधिक (क्रमशः 52,000 और 51,000 हेक्टेयर) लक्ष्य रखा गया है। जैसे ही बारिश में तेजी आएगी, कृषि कार्यों में भी तेजी आने की उम्मीद है।
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