राजस्थान में जन्मे भारतीय वैज्ञानिक प्रोफेसर जैनेंद्र के. जैन को भौतिकी के प्रतिष्ठित वोल्फ पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। उन्हें यह सम्मान ‘कंपोजिट फर्मिऑन्स’ (composite fermions) की अभूतपूर्व खोज के लिए दिया गया है। उनकी इस खोज ने ‘फ्रैक्शनल क्वांटम हॉल इफेक्ट’ (fractional quantum Hall effect) के बारे में हमारी समझ को पूरी तरह से बदल दिया है। इस क्रांतिकारी सिद्धांत ने संघनित पदार्थ भौतिकी (condensed matter physics) के क्षेत्र में एक नई क्रांति ला दी है। प्रोफेसर जैन की यह सफलता उनके छोटे से रेगिस्तानी शहर से निकलकर वैश्विक पटल पर छाने की कहानी है। उनका जीवन व्यक्तिगत त्रासदी और शारीरिक चुनौतियों को मात देने के जज्बे का एक अद्भुत उदाहरण है। एक गंभीर ट्राम दुर्घटना और ‘जयपुर फुट’ के इस्तेमाल जैसी चुनौतियों से गुजरते हुए उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी। टीवी देखते समय आए एक विचार ने उनकी शोध की दिशा को बदल दिया और भौतिकी के जटिल रहस्यों को सुलझाने में मदद की। उनकी यह उपलब्धि न केवल भारत के लिए गर्व का विषय है, बल्कि दुनिया भर के शोधकर्ताओं के लिए प्रेरणास्रोत भी है। कठिन परिस्थितियों में भी उनका अटूट धैर्य और बौद्धिक खोज के प्रति समर्पण सराहनीय है। यह पुरस्कार उनके द्वारा दशकों से किए जा रहे कठोर परिश्रम और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को मान्यता देता है।
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