तमिलनाडु में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) को लेकर तीन-भाषा फॉर्मूले पर विरोध जारी है। राज्यपाल ने अपने संबोधन में राज्य की दो-भाषा नीति को जारी रखने की बात कही। उन्होंने केंद्र सरकार से तीन-भाषा व्यवस्था को लेकर पुनर्विचार करने की अपील की। राज्य सरकार लंबे समय से इस मुद्दे पर अपनी अलग नीति का समर्थन करती रही है। तमिलनाडु में भाषा नीति को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस होती रही है। राज्य के नेताओं का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में स्थानीय जरूरतों को महत्व मिलना चाहिए। वहीं केंद्र की शिक्षा नीति में तीन भाषाओं के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया गया है। इस मुद्दे पर केंद्र और राज्य के बीच मतभेद सामने आते रहे हैं। राज्यपाल के बयान के बाद यह बहस फिर तेज हो गई है। भाषा और शिक्षा नीति तमिलनाडु की राजनीति में महत्वपूर्ण विषय माने जाते हैं। आने वाले समय में इस मुद्दे पर केंद्र और राज्य के बीच चर्चा जारी रह सकती है। यह मामला देश में शिक्षा और भाषाई विविधता से जुड़ी बहस को भी दर्शाता है।
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