होर्मुज स्ट्रेट क्षेत्र में युद्ध के दौरान जहाज पर कार्यरत शिवानंद चौरसिया की मृत्यु हो गई थी। घटना के बाद उनका शव आठ दिन बाद उत्तर प्रदेश के देवरिया स्थित पैतृक घर पहुंचा। शव के गांव पहुंचते ही पूरे क्षेत्र में शोक की लहर फैल गई। घर के बाहर एंबुलेंस रुकते ही परिजनों का दर्द छलक पड़ा। पत्नी और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। परिवार के सदस्य अपने प्रियजन को अंतिम बार देखने के लिए एकत्र हुए। आसपास के ग्रामीण भी बड़ी संख्या में श्रद्धांजलि देने पहुंचे। हर किसी की आंखें नम थीं और माहौल बेहद भावुक हो गया। शिवानंद की असमय मृत्यु से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। रिश्तेदार और शुभचिंतक परिजनों को सांत्वना देने में जुटे रहे। गांव में पूरे दिन शोक और संवेदना का माहौल बना रहा। अंतिम दर्शन के दौरान लोगों ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
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