भारतीय रुपया गुरुवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर बंद हुआ। कारोबार के दौरान रुपये में 21 पैसे की गिरावट दर्ज की गई। इसके साथ ही डॉलर के मुकाबले इसकी कीमत 94.66 तक पहुंच गई। बाजार पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख का असर देखने को मिला। फेड की नीतियों से डॉलर इंडेक्स मजबूत हुआ, जिससे उभरते बाजारों की मुद्राओं पर दबाव बढ़ा। एशियाई देशों की कई मुद्राओं में भी कमजोरी दर्ज की गई। इसका प्रभाव भारतीय मुद्रा पर भी पड़ा। विदेशी मुद्रा बाजार में निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया। हालांकि कुछ सकारात्मक संकेतों ने बाजार की चिंताओं को आंशिक रूप से कम किया। अमेरिका और ईरान के बीच समझौता ज्ञापन की खबरों से उम्मीद बढ़ी। इसके अलावा अमेरिका और भारत के बीच व्यापार समझौते में प्रगति की रिपोर्ट भी सामने आई। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम आगे भी रुपये की दिशा तय करेंगे।
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