अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान के साथ संभावित समझौते के लिए तीन प्रमुख सिद्धांतों की रूपरेखा प्रस्तुत की है। उनके अनुसार समझौते का पहला और सबसे महत्वपूर्ण आधार यह है कि ईरान परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा। दूसरा प्रमुख बिंदु होर्मुज़ जलडमरूमध्य में अंतरराष्ट्रीय समुद्री आवाजाही को खुला और सुरक्षित बनाए रखना है। यह मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। तीसरी शर्त आर्थिक लाभ और सहायता से जुड़ी है, जिसके लिए ईरान को निर्धारित मानकों का पालन करना होगा। वेंस ने कहा कि आर्थिक सहयोग तभी संभव होगा जब ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को समाप्त करे। इसके साथ ही उसे क्षेत्रीय उग्रवादी संगठनों को समर्थन देना भी बंद करना होगा। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि वह केवल आश्वासनों पर नहीं बल्कि ठोस कदमों पर भरोसा करेगा। वाशिंगटन ने स्पष्ट किया है कि समझौते की सफलता ईरान की वास्तविक कार्रवाई पर निर्भर करेगी। अमेरिका का दावा है कि उसकी रणनीतिक स्थिति ईरान की प्रतिक्रिया से प्रभावित नहीं होगी। इस प्रस्तावित ढांचे को क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक सुरक्षा के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन शर्तों पर सहमति बनना आसान नहीं होगा। ईरान की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया पर भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी हुई है। संभावित समझौता मध्य पूर्व की राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है। आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।
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