छत्तीसगढ़ के रायपुर रेलवे स्टेशन पर टिकट जांच के दौरान एक दिलचस्प और चर्चित स्थिति देखने को मिली। सुबह करीब 10:30 बजे पूछताछ काउंटर के सामने बने हॉल में तीन महिला टीटी रसीद बुक के साथ तैनात नजर आईं। वे आने-जाने वाले यात्रियों पर लगातार नजर रख रही थीं। कुछ समय बाद स्टेशन परिसर में टिकट जांच अभियान शुरू किया गया। इस दौरान कई यात्रियों से उनके टिकटों के संबंध में पूछताछ की गई। जांच के दौरान ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले यात्रियों पर विशेष ध्यान दिए जाने की बात सामने आई। इससे स्टेशन पर मौजूद लोगों के बीच चर्चा का माहौल बन गया। कई यात्रियों ने टिकट जांच की प्रक्रिया को लेकर अपने अनुभव साझा किए। कुछ लोगों का मानना था कि जांच के लिए यात्रियों का चयन असमान रूप से किया जा रहा है। वहीं रेलवे अधिकारियों की ओर से टिकट जांच को नियमित प्रक्रिया बताया जाता है। बिना टिकट यात्रा रोकने और राजस्व संरक्षण के लिए ऐसे अभियान समय-समय पर चलाए जाते हैं। हालांकि ग्रामीण यात्रियों पर अधिक ध्यान दिए जाने को लेकर सवाल उठते रहे। स्टेशन परिसर में फाइन वसूली और जांच की कार्यप्रणाली चर्चा का विषय बनी रही। यात्रियों के बीच यह जानने की उत्सुकता रही कि जांच के लिए किन मानकों का उपयोग किया जाता है। पूरे घटनाक्रम ने टिकट जांच व्यवस्था और उसके क्रियान्वयन को लेकर बहस को जन्म दे दिया है।
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