छत्तीसगढ़ में खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही खाद और डीएपी की कमी ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। पूर्व मुख्यमंत्री और पाटन विधायक भूपेश बघेल ने दुर्ग जिले की कई सहकारी समितियों का निरीक्षण किया और राज्य सरकार पर किसानों की अनदेखी का आरोप लगाया। बघेल ने कहा कि किसान समय पर खाद न मिलने से परेशान हैं और एनपीके खाद का विकल्प थमाया जा रहा है, जो किसानों के लिए महंगा साबित हो रहा है। उन्होंने वितरण प्रणाली में पारदर्शिता की कमी और दलाली के आरोपों पर भी चिंता जताई। इसके जवाब में विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह ने स्थिति को नए नजरिए से देखते हुए किसानों को रासायनिक खादों के बजाय जैविक और प्राकृतिक खेती अपनाने की सलाह दी। रमन सिंह का तर्क है कि डीएपी और यूरिया का अत्यधिक उपयोग न केवल मिट्टी की उर्वरता कम कर रहा है, बल्कि मानव स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक है। इस प्रकार, खाद संकट को लेकर प्रदेश में एक तरफ जहां विपक्ष ने सरकार की व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं, वहीं सत्तापक्ष ने कृषि पद्धति में बदलाव का आह्वान किया है।
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