आठ वर्षीय कोडी एक दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी सैन्फिलिपो सिंड्रोम से जूझ रहा है। इस बीमारी को अक्सर ‘चाइल्डहुड डिमेंशिया’ भी कहा जाता है। यह एक प्रगतिशील और वर्तमान में लाइलाज विकार है, जो धीरे-धीरे बच्चों की शारीरिक और मानसिक क्षमताओं को प्रभावित करता है। कोडी की मां जॉर्जिया ने अपने बेटे की दर्दनाक स्थिति को साझा किया है। उनका कहना है कि वह हर दिन अपने बच्चे को धीरे-धीरे खोते हुए देख रही हैं। बीमारी के कारण कोडी की बोलने, चलने-फिरने और सामान्य गतिविधियां करने की क्षमता लगातार कम होती जा रही है। सैन्फिलिपो सिंड्रोम बच्चों की याददाश्त और संज्ञानात्मक क्षमताओं पर भी गंभीर असर डालता है। समय के साथ रोगी अपनी कई बुनियादी क्षमताएं खो सकते हैं। परिवार इस कठिन दौर में उम्मीद बनाए हुए है। उन्हें विश्वास है कि जीन थेरेपी जैसी उभरती चिकित्सा तकनीकें बीमारी की रफ्तार को धीमा कर सकती हैं। उनका लक्ष्य कोडी के साथ अधिक से अधिक गुणवत्तापूर्ण समय बिताना है। इस मामले ने दुर्लभ आनुवंशिक रोगों के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता को भी उजागर किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे रोगों पर अनुसंधान और उपचार विकल्पों के विकास को और प्रोत्साहन मिलना चाहिए।
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