जिम्बाब्वे के पूर्वी हाइलैंड्स में बसे जलवायु शरणार्थियों पर अब बेदखली का खतरा मंडरा रहा है। सूखे की मार झेलने वाले कई किसान अपने पैतृक इलाकों को छोड़कर उपजाऊ भूमि की तलाश में यहाँ आकर बस गए थे। अब सरकार की ओर से इन इलाकों में सख्त कार्रवाई तेज कर दी गई है, जिससे यहाँ रहने वाले परिवारों में डर का माहौल है। जलवायु परिवर्तन के कारण कृषि संकट ने इन लोगों को विस्थापित होने पर मजबूर किया था, लेकिन अब वे अपनी आजीविका और आवास के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इन शरणार्थियों का कहना है कि उनके पास वापस जाने के लिए कोई विकल्प नहीं बचा है और यहाँ से बेदखल होने का मतलब भुखमरी की ओर धकेले जाना है। इस क्षेत्र में सुरक्षा बलों की बढ़ती उपस्थिति ने तनाव को और बढ़ा दिया है। मानवाधिकार संगठनों ने सरकार से मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की अपील की है। फिलहाल, सैकड़ों परिवार अनिश्चित भविष्य और घर खोने की आशंका के बीच जी रहे हैं। स्थानीय प्रशासन इसे भूमि का अनधिकृत अतिक्रमण बताकर कार्रवाई कर रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए इस पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता जताई जा रही है।
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