आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि संगठन भारत और पाकिस्तान के बीच लोगों के बीच संवाद (people-to-people talks) का समर्थन करता है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान के संबंध में आरएसएस पूरी तरह से भारत सरकार की आधिकारिक नीति का ही पालन करेगा। भागवत का यह बयान दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों को लेकर एक संतुलित दृष्टिकोण पेश करता है। उन्होंने संकेत दिया कि हालांकि व्यक्तिगत स्तर पर संबंधों में सुधार की गुंजाइश है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा और कूटनीति के मामलों में सरकार का रुख ही अंतिम होगा। यह स्पष्ट करता है कि आरएसएस राष्ट्रीय हितों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगा। यह बयान उन अटकलों को शांत करने के लिए भी महत्वपूर्ण है जो अक्सर सरकार और आरएसएस के बीच पाकिस्तान नीति को लेकर लगाई जाती हैं। भागवत ने इस बात पर जोर दिया कि एक मजबूत और सुरक्षित भारत के लिए सरकार की रणनीति ही सर्वोपरि है। संगठन का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रहित को सुरक्षित रखना और कूटनीतिक सीमाओं के भीतर काम करना है। यह बयान वर्तमान भू-राजनीतिक परिदृश्य में संगठन की स्पष्ट विचारधारा को दर्शाता है।
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