राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने पाकिस्तान के साथ संवाद बनाए रखने की वकालत की है। उन्होंने कहा कि भारत को बातचीत के रास्ते पूरी तरह बंद नहीं करने चाहिए। भागवत ने आरएसएस के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले के विचारों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र को संवाद और संपर्क के अवसर खुले रखने चाहिए। अपने वक्तव्य में उन्होंने कहा कि भारत का दृष्टिकोण हिटलर जैसी कट्टर और बंद सोच वाला नहीं होना चाहिए। उनका मानना है कि मतभेदों के बावजूद बातचीत का मार्ग शांति और स्थिरता के लिए आवश्यक है। भागवत ने संकेत दिया कि पड़ोसी देशों के साथ संबंधों में संतुलित दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। उन्होंने संवाद को कूटनीतिक और मानवीय दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया। इस बयान को भारत-पाकिस्तान संबंधों पर आरएसएस के रुख के रूप में देखा जा रहा है। उनके विचारों ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में नई चर्चा को जन्म दिया है। बयान का मुख्य संदेश यह है कि कठिन परिस्थितियों में भी संवाद के रास्ते खुले रखना बेहतर विकल्प हो सकता है।
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