खेती में अच्छी पैदावार सुनिश्चित करने के लिए फसल के शुरुआती 20-30 दिन अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि फसल के ‘तीन बड़े दुश्मनों’—कीट, रोग और खरपतवार—की सही समय पर पहचान और प्रबंधन से उत्पादन में 25 से 30 प्रतिशत तक की वृद्धि की जा सकती है। खरपतवार मुख्य फसल के पोषक तत्व, धूप और नमी छीन लेते हैं, जबकि कीट और बीमारियां पौधों को अंदर से खोखला कर देती हैं। कीटों के लिए नीम के तेल का उपयोग और गंभीर स्थिति में विशेषज्ञ की सलाह पर कीटनाशकों का प्रयोग प्रभावी है। इसी तरह, प्रमाणित बीजों का चयन, रोगग्रस्त पौधों को नष्ट करना और फफूंदनाशकों का सही अंतराल पर छिड़काव रोगों से सुरक्षा देता है। खरपतवार नियंत्रण के लिए बुवाई के 20-25 दिन और 40-45 दिन बाद निराई-गुड़ाई अनिवार्य है। किसान अपनी खेती में रसायनों के साथ-साथ पारंपरिक विधियों, जैसे कि बुवाई के एक महीने बाद जुताई करना, का भी उपयोग कर सकते हैं, जैसा कि रामपुर के किसान रोहित कुमार राठिया ने अपनी फसल में 20% तक उत्पादन बढ़ाकर साबित किया है। कोई भी दवा खरीदने से पहले हमेशा कृषि विज्ञान केंद्र या मोबाइल ऐप के माध्यम से लक्षणों की पुष्टि करना उचित रहता है।
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