जम्मू-कश्मीर में सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम (AFSPA) को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है। राज्य की मंत्री सकीना इट्टू ने पूर्वोत्तर राज्यों से पहले जम्मू-कश्मीर से AFSPA हटाने की मांग की है। सकीना इट्टू मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के मंत्रिमंडल की एकमात्र महिला मंत्री हैं। उन्हें सत्तारूढ़ दल के भीतर प्रभावशाली और सम्मानित नेताओं में गिना जाता है। AFSPA को जम्मू-कश्मीर में 10 सितंबर 1990 को लागू किया गया था। यह कानून सुरक्षा बलों को विशेष अधिकार प्रदान करता है। इसके समर्थक इसे सुरक्षा व्यवस्था के लिए आवश्यक बताते हैं। वहीं विरोधी इसे नागरिक अधिकारों से जुड़े सवालों के संदर्भ में देखते हैं। उमर अब्दुल्ला अपने पहले मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान भी इस कानून को लेकर अपनी राय व्यक्त कर चुके हैं। वर्ष 2009 से 2014 के बीच उन्होंने शांतिपूर्ण क्षेत्रों से चरणबद्ध तरीके से AFSPA हटाने की वकालत की थी। मौजूदा बयान ने इस मुद्दे को फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। आने वाले समय में इस विषय पर केंद्र और राज्य स्तर पर बहस और तेज होने की संभावना है।
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