भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने कहा है कि भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में एल नीनो की स्थिति बन चुकी है। विभाग के अनुसार मानसून के मौसम के दौरान इसके और अधिक मजबूत होने की संभावना है। एल नीनो मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के जल के असामान्य रूप से गर्म होने की घटना है। भारत में यह स्थिति अक्सर कमजोर मानसून से जुड़ी मानी जाती है। मौसम विभाग की ताजा भविष्यवाणी ने कृषि और जल प्रबंधन से जुड़े क्षेत्रों में चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि कमजोर वर्षा का असर खेती और खाद्य उत्पादन पर पड़ सकता है। कृषि मंत्रालय ने देश के 197 जिलों को एल नीनो के प्रभावों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील बताया है। इन जिलों में संभावित जोखिमों को देखते हुए अग्रिम तैयारी की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है। नीति-निर्माताओं को समय रहते वैकल्पिक और आपातकालीन योजनाएं सक्रिय करने की सलाह दी गई है। जल संसाधनों के प्रबंधन और फसल सुरक्षा उपायों को भी प्राथमिकता देने की जरूरत बताई गई है। किसानों को मौसम संबंधी अपडेट पर लगातार नजर रखने की सलाह दी जा रही है। आने वाले महीनों में एल नीनो की तीव्रता और मानसून पर उसके प्रभाव पर विशेष निगरानी रखी जाएगी।
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