छत्तीसगढ़ के रामचंद्रपुर क्षेत्र में नाबार्ड वित्तपोषित संसदीय संकुल विकास परियोजना के तहत किसानों के लिए जागरूकता और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम माता राजमोहिनी देवी संकुल मिनवाखांड और आसपास के गांवों में हुआ, जिसमें किसानों को बायोफोर्टिफाइड गेहूं और मड़ुआ की उन्नत खेती की तकनीकों की जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि इन फसलों से न केवल उत्पादन बढ़ाया जा सकता है, बल्कि पोषण सुरक्षा को भी मजबूत किया जा सकता है। कार्यक्रम में किसानों को वैज्ञानिक तरीके से मिट्टी की जांच कराने और उसकी गुणवत्ता के अनुसार खेती करने की सलाह दी गई। इसके आधार पर कृषि योजना बनाने पर जोर दिया गया। किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज और समय-समय पर तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की बात कही गई। अधिकारियों ने बताया कि इस परियोजना का उद्देश्य कृषि उत्पादकता बढ़ाना और पोषणयुक्त फसलों को बढ़ावा देना है। साथ ही क्षेत्र में मिलेट मिल की स्थापना की भी जानकारी दी गई, जिससे मोटे अनाजों की स्थानीय प्रोसेसिंग संभव होगी। इससे किसानों को बेहतर बाजार मूल्य मिलने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है। किसानों ने इस पहल को आत्मनिर्भर कृषि की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
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