भारतीय निशानेबाजी जगत 49 वर्ष की आयु में जसपाल राणा के निधन से गहरे शोक में है। वे केवल एक सफल निशानेबाज ही नहीं, बल्कि देश के सबसे प्रभावशाली कोचों में भी गिने जाते थे। राणा ने कई युवा खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर समेत कई शीर्ष निशानेबाज उनके मार्गदर्शन में निखरे। उनकी कोचिंग शैली तकनीक से अधिक मानसिक मजबूती और एकाग्रता पर केंद्रित थी। वे खिलाड़ियों के मनोविज्ञान को समझने और उनकी क्षमता को सही दिशा देने के लिए प्रसिद्ध थे। राणा का मानना था कि सफलता के लिए अनुशासन, निरंतर अभ्यास और मानसिक संतुलन सबसे महत्वपूर्ण हैं। वे खिलाड़ियों को आत्मसंतुष्टि से बचने और लगातार बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करते थे। सोशल मीडिया और अन्य ध्यान भटकाने वाले तत्वों से दूरी बनाए रखने की सलाह भी उनकी कोचिंग का अहम हिस्सा थी। उनके मार्गदर्शन में भारतीय शूटिंग ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई ऊंचाइयों को छुआ। खेल जगत उन्हें एक दूरदर्शी कोच, प्रेरक गुरु और भारतीय निशानेबाजी के मजबूत स्तंभ के रूप में हमेशा याद रखेगा।
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