दक्षिण अफ्रीका में विदेशी नागरिकों के खिलाफ बढ़ती जेनोफोबिक (विदेशी-विरोधी) धमकियों के कारण हजारों मलावी प्रवासियों को अपना घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा है। 30 जून की निष्कासन की समय-सीमा (अल्टीमेटम) दिए जाने के बाद से ये लोग डर्बन के एक पार्क में शरण लेने को विवश हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रवासियों में भारी दहशत का माहौल है। दक्षिण अफ्रीका में रह रहे अन्य विदेशी नागरिकों के लिए भी यह एक चिंताजनक स्थिति बनी हुई है। स्थानीय प्रशासन और मानवाधिकार संगठन इन विस्थापित लोगों की सुरक्षा और उन्हें राहत सामग्री उपलब्ध कराने के लिए प्रयास कर रहे हैं। इस घटना ने एक बार फिर दक्षिण अफ्रीका में विदेशी-विरोधी हिंसा और प्रवासियों के अधिकारों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज कर दी है। प्रवासियों का आरोप है कि उन्हें निशाना बनाकर डराया-धमकाया जा रहा है, जिससे उनका सामान्य जीवन पूरी तरह ठप हो गया है। डर्बन के पार्क में अस्थायी आश्रय स्थल बनाए गए हैं, जहां साफ-सफाई और भोजन की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुदायों ने दक्षिण अफ्रीका सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप करने और अल्पसंख्यकों तथा प्रवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है। फिलहाल स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और हजारों लोग अनिश्चित भविष्य के बीच डर्बन में रहने को मजबूर हैं।
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