छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के बसना क्षेत्र के चोरभट्टी गांव के रहने वाले सीताराम सागर की कहानी संघर्ष और सफलता का उदाहरण है। आर्थिक तंगी के कारण उन्होंने शुरुआती जीवन में अपने पिता के साथ मजदूरी भी की और पढ़ाई छोड़ने की स्थिति तक पहुंच गए थे। बाद में उन्होंने आरक्षक के रूप में पुलिस सेवा में भर्ती होकर अपना करियर शुरू किया। वर्तमान में वे बस्तर क्षेत्र में नक्सल विरोधी अभियानों में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने थुलथुली जैसे कई बड़े मुठभेड़ अभियानों में साहस और नेतृत्व का परिचय दिया है। उनके कार्यों ने सुरक्षा बलों के बीच एक मजबूत पहचान बनाई है। कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने अपने कर्तव्य के प्रति समर्पण बनाए रखा। स्थानीय लोग और अधिकारी उनके साहस और मेहनत की सराहना करते हैं। उनकी कहानी युवाओं के लिए प्रेरणा मानी जा रही है। यह उदाहरण दिखाता है कि कठिनाइयों के बावजूद दृढ़ संकल्प से सफलता हासिल की जा सकती है।
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