छत्तीसगढ़ के बैकुंठपुर में एक बड़े उर्वरक घोटाले का मामला सामने आया है। आदिम जाति सेवा सहकारी समिति जिल्दा के चार खाद गोदामों को प्रशासन द्वारा सील किए जाने के बाद भी सोसायटी मैनेजर ने नियमों की अनदेखी की। आरोप है कि मैनेजर ने चोरी-छिपे कागजों में हेरफेर करते हुए 115 से अधिक किसानों को खाद वितरण करना दिखा दिया। इस फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब 12 मई को ग्राम पंचायत बचरा में आयोजित सुशासन शिविर में किसानों ने इसकी शिकायत दर्ज कराई। पीड़ित किसानों का कहना है कि उन्हें वास्तविक खाद नहीं मिली, जबकि रिकॉर्ड में वितरण दर्शाया गया है। अब किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि या तो उन्हें खाद उपलब्ध कराई जाए या फिर इस घोटाले के लिए जिम्मेदार सोसायटी मैनेजर से इसकी वसूली की जाए। मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन जांच में जुट गया है। यह घटना सहकारी समितियों में व्याप्त भ्रष्टाचार और सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग की एक बड़ी मिसाल है। किसान न्याय की आस में अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं। मामले में सख्त कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
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