अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन ने कई प्रमुख चीनी कंपनियों को अपनी ‘चीनी सैन्य कंपनी’ सूची में शामिल किया है। इस कदम ने अमेरिका और चीन के बीच रणनीतिक तथा आर्थिक तनाव को फिर चर्चा में ला दिया है। सूची में शामिल कंपनियों पर आरोप है कि उनके संबंध चीन के रक्षा औद्योगिक तंत्र से जुड़े हो सकते हैं। पेंटागन का कहना है कि ये कंपनियां प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से चीन की सैन्य क्षमताओं को समर्थन पहुंचा सकती हैं। इस सूची में शामिल होने से कंपनियों की अंतरराष्ट्रीय कारोबारी गतिविधियों पर प्रभाव पड़ने की आशंका है। हालांकि सूची में नाम आने का अर्थ तत्काल आर्थिक प्रतिबंध लगना नहीं होता। फिर भी यह कदम अमेरिकी सरकारी एजेंसियों और रक्षा क्षेत्र से जुड़े अनुबंधों को प्रभावित कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे निवेशकों और वैश्विक बाजारों की चिंताएं बढ़ सकती हैं। अमेरिका लंबे समय से राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर चीनी कंपनियों की गतिविधियों की समीक्षा करता रहा है। चीन आमतौर पर ऐसे आरोपों को खारिज करता रहा है और इन्हें राजनीतिक रूप से प्रेरित बताता है। यह निर्णय दोनों देशों के बीच तकनीकी, व्यापारिक और सुरक्षा प्रतिस्पर्धा की व्यापक पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है। आने वाले समय में इस मुद्दे पर कूटनीतिक प्रतिक्रियाएं और बढ़ सकती हैं। वैश्विक व्यापार और प्रौद्योगिकी क्षेत्र भी इस घटनाक्रम पर करीब से नजर बनाए हुए हैं।
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