दुनिया भर में परमाणु हथियारों पर होने वाला खर्च 2025 में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार परमाणु शस्त्रागार रखने वाले देशों ने इस क्षेत्र में कुल 119 अरब डॉलर से अधिक खर्च किया। रिपोर्ट में बताया गया है कि यह राशि पिछले वर्ष की तुलना में काफी अधिक है। अंतरराष्ट्रीय परमाणु हथियार उन्मूलन अभियान (ICAN) के अनुसार 2025 में देशों ने अपने परमाणु कार्यक्रमों पर अतिरिक्त 16.8 अरब डॉलर खर्च किए। यह बढ़ोतरी वैश्विक सुरक्षा और हथियारों की होड़ को लेकर नई चिंताएं पैदा कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते सैन्य निवेश से अंतरराष्ट्रीय तनाव और बढ़ सकता है। परमाणु शक्ति संपन्न देश अपने शस्त्रागार के आधुनिकीकरण और विस्तार पर लगातार निवेश कर रहे हैं। रिपोर्ट में परमाणु निरस्त्रीकरण के प्रयासों की धीमी प्रगति पर भी चिंता जताई गई है। कई शांति संगठनों ने इस खर्च को मानव विकास और सामाजिक कल्याण की जरूरतों से विपरीत बताया है। उनका कहना है कि इतनी बड़ी राशि स्वास्थ्य, शिक्षा और जलवायु परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में उपयोग की जा सकती थी। वैश्विक स्तर पर परमाणु हथियारों की भूमिका को लेकर बहस लगातार जारी है। सुरक्षा और निरस्त्रीकरण के बीच संतुलन बनाने की चुनौती भी बनी हुई है। यह रिपोर्ट दुनिया में बढ़ती सैन्य प्रतिस्पर्धा की ओर संकेत करती है।
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