तृणमूल कांग्रेस के भीतर उभरी कथित बगावत ने राष्ट्रीय राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। पार्टी के कुछ असंतुष्ट सांसद अलग समूह बनाने की कोशिश में बताए जा रहे हैं। बागी खेमे का दावा है कि उसे लोकसभा के करीब 20 सांसदों का समर्थन प्राप्त है। यदि यह दावा सही साबित होता है तो संसद के शक्ति संतुलन पर बड़ा प्रभाव पड़ सकता है। रिपोर्टों के अनुसार यह समूह अलग पहचान हासिल कर सत्तारूढ़ एनडीए का समर्थन करने की तैयारी में है। राजनीतिक विश्लेषक इसे विपक्षी एकजुटता के लिए बड़ा झटका मान रहे हैं। इस घटनाक्रम से संसद में सरकार की विधायी ताकत और बढ़ सकती है। मामला दल-बदल कानून की व्याख्या और उसके प्रावधानों को लेकर भी चर्चा का विषय बन गया है। अलग गुट को मान्यता मिलने की स्थिति में राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं। यह स्थिति ममता बनर्जी और उनकी पार्टी के लिए गंभीर चुनौती मानी जा रही है। पार्टी नेतृत्व के सामने संगठनात्मक एकजुटता बनाए रखने की परीक्षा खड़ी हो गई है। आने वाले दिनों में सांसदों की वास्तविक संख्या और उनके रुख पर सबकी नजर रहेगी। इस संभावित विभाजन का असर पश्चिम बंगाल की राजनीति से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक महसूस किया जा सकता है।
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