बिलासपुर के पंचम अपर मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण ने सड़क हादसे के एक मामले में अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि दो वाहनों की आमने-सामने की टक्कर होने मात्र से यह नहीं माना जा सकता कि दोनों ही चालक बराबर के दोषी हैं। इस मामले में सड़क हादसे के दौरान ससुर और दामाद की मृत्यु हो गई थी। पीड़ित पक्ष की ओर से मुआवजे के लिए दावा पेश किया गया था। बीमा कंपनी ने तर्क दिया था कि दुर्घटना में दोनों वाहनों की लापरवाही थी, इसलिए मुआवजे में कटौती होनी चाहिए। हालांकि, अदालत ने बीमा कंपनी के इस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि केवल टक्कर होने से ही किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। दुर्घटना के ठोस साक्ष्यों और परिस्थितियों का आकलन करना आवश्यक है। अदालत ने संबंधित बीमा कंपनी को पीड़ित परिवारों को पूरा मुआवजा देने का आदेश दिया है। इस फैसले को सड़क दुर्घटना मामलों में एक महत्वपूर्ण नजीर माना जा रहा है। यह निर्णय स्पष्ट करता है कि बिना ठोस सबूत के किसी भी पक्ष को दोषी मानकर राहत से वंचित नहीं किया जा सकता।
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