पश्चिम बंगाल में चुनावी झटके के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर राजनीतिक उथल-पुथल तेज होती दिखाई दे रही है। रिपोर्टों के अनुसार, पार्टी के कई लोकसभा सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र भेजकर भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का समर्थन करने की इच्छा जताई है। बागी खेमे का दावा है कि लगभग 20 सांसद इस पहल के साथ हैं। इस घटनाक्रम ने टीएमसी के संसदीय दल में संभावित विभाजन की अटकलों को बढ़ा दिया है। वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार को इस अभियान का प्रमुख चेहरा माना जा रहा है। बागी सांसदों का कहना है कि उनका कदम राजनीतिक और विकास संबंधी प्राथमिकताओं से प्रेरित है। कुछ नेताओं ने अलग संसदीय समूह के रूप में मान्यता देने की भी मांग की है। इस बीच पार्टी नेतृत्व स्थिति को संभालने की कोशिश में जुटा हुआ है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अन्य वरिष्ठ नेताओं की गतिविधियों पर राजनीतिक गलियारों की नजर बनी हुई है। विपक्षी दलों और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह संकट राष्ट्रीय राजनीति को भी प्रभावित कर सकता है। यदि बड़ी संख्या में सांसद अलग रुख अपनाते हैं तो संसद में टीएमसी की ताकत कमजोर हो सकती है। घटनाक्रम ने इंडिया गठबंधन के भीतर टीएमसी की भविष्य की भूमिका को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि अंतिम स्थिति लोकसभा अध्यक्ष के निर्णय और आगे की राजनीतिक बातचीत पर निर्भर करेगी।
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