तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने स्पीकर के उस फैसले को कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें रितब्रत बनर्जी को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष नियुक्त किया गया था। पार्टी का तर्क है कि निष्कासित सदस्य को इस पद पर नियुक्त नहीं किया जा सकता। टीएमसी ने स्पीकर की व्याख्या पर सवाल उठाते हुए इसे पार्टी संविधान के खिलाफ बताया है। यह मामला तब सामने आया जब 58 विधायकों ने रितब्रत बनर्जी के समर्थन का दावा किया था। इस घटनाक्रम ने पार्टी के भीतर आंतरिक मतभेदों को भी उजागर कर दिया है। कानूनी लड़ाई के चलते पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल बढ़ गई है। हाईकोर्ट अब इस नियुक्ति और स्पीकर के फैसले की वैधता की समीक्षा करेगा। मामले को लेकर राजनीतिक और कानूनी बहस तेज हो गई है।
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