छत्तीसगढ़ के मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के सरखेड़ा गांव में ग्रामीण महिलाओं का आत्मनिर्भर बनने का सपना अब कर्ज के बोझ में बदल गया है। पिछली सरकार के दौरान ‘रूरल इंडस्ट्रियल पार्क’ (रीपा) और ‘गोधन न्याय योजना’ के तहत इन महिलाओं ने गोबर से प्राकृतिक पेंट बनाने की यूनिट शुरू की थी। इस व्यवसाय को खड़ा करने के लिए महिलाओं ने सामूहिक रूप से 12 लाख रुपये का कर्ज लिया था। प्रशासन ने भरोसा दिया था कि सरकारी भवनों, स्कूलों और आंगनबाड़ियों की पुताई इसी पेंट से होगी, जिससे उनकी आमदनी का जरिया बनेगा। हालांकि, सत्ता परिवर्तन के बाद सरकारी खरीद और प्रोत्साहन में कमी के चलते यह यूनिट अब पूरी तरह ठप पड़ गई है। बड़ी मात्रा में तैयार पेंट का स्टॉक बिक नहीं पा रहा है, जिससे महिलाओं के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। बैंक से लिए गए कर्ज का भुगतान करना अब उनके लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। इस स्थिति ने सरकार की ग्रामीण औद्योगिक नीतियों के क्रियान्वयन और निरंतरता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय ग्रामीण महिलाएं अब सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप करने और उनके उत्पादों के लिए बाजार उपलब्ध कराने की मांग कर रही हैं, ताकि वे कर्ज के जाल से मुक्त हो सकें।
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