पंजाब के जगराओं में नशे की ओवरडोज से युवाओं की लगातार हो रही मौतों के खिलाफ सोमवार को जबरदस्त विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। पेंडू मजदूर यूनियन के नेतृत्व में पीड़ित परिवारों ने बस स्टैंड परिसर से लेकर सड़कों तक एक विशाल रोष मार्च निकाला। इस भावुक और आक्रोशपूर्ण प्रदर्शन में करीब 14 ऐसे परिवार शामिल हुए जिन्होंने नशे के कारण अपने बेटों, पतियों और भाइयों को हमेशा के लिए खो दिया है। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में अपने दिवंगत प्रियजनों की तस्वीरें लेकर सरकार की ‘युद्ध नशे के विरुद्ध’ मुहिम की विफलता पर गंभीर सवाल उठाए। पीड़ित परिजनों ने आरोप लगाया कि प्रशासन कई मामलों में नशे से होने वाली मौतों को हार्ट अटैक बताकर मामले को दबाने की कोशिश करता है। उन्होंने यह भी कहा कि जब वे शिकायत दर्ज कराने का प्रयास करते हैं, तो उन पर सामाजिक बदनामी का हवाला देकर चुप रहने का दबाव बनाया जाता है। यूनियन नेताओं ने आरोप लगाया कि पुलिस नशा तस्करों पर नकेल कसने के बजाय उल्टा पीड़ित युवकों पर ही आपराधिक मामले दर्ज कर देती है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि नशे से हुई सभी संदिग्ध मौतों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और नशा तस्करों से मिले अधिकारियों पर कार्रवाई हो। प्रदर्शन के दौरान माहौल बेहद गमगीन रहा और कई बुजुर्ग व महिलाएं अपनी आपबीती सुनाते हुए रो पड़े। रैली में शामिल एक पीड़ित पिता ने बताया कि उनके दो बेटों की मौत नशे के कारण हो चुकी है और अब वे पूरी तरह अकेले हो गए हैं। वहीं एक अन्य मृतक की पत्नी ने बताया कि पति की मौत के बाद उनके तीन छोटे बच्चों के पालन-पोषण के लिए गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से मांग की है कि प्रत्येक प्रभावित परिवार को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा और आश्रितों को सरकारी नौकरी दी जाए। इसके साथ ही पीड़ित बच्चों की मुफ्त शिक्षा, विधवाओं के लिए पेंशन और नशा मुक्ति केंद्रों में बेहतर उपचार की सुविधाएं बढ़ाने की मांग की गई है। प्रदर्शन के अंत में मुख्यमंत्री के नाम प्रशासन को एक ज्ञापन सौंपकर नशा माफियाओं के खिलाफ तत्काल और सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की गई।
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