कर्नाटक के सरकारी स्कूलों में 1 जून से नली-कली (Nali Kali) प्रणाली से बदलकर मोनो-ग्रेड द्विभाषी कक्षाओं की शुरुआत की गई है। इस नीतिगत बदलाव के बाद राज्य भर के स्कूलों में बुनियादी ढांचे की भारी कमी देखी जा रही है। फर्नीचर के अभाव में छात्र फर्श पर बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। कई स्कूलों में डेस्क और बेंच की कमी है, जिसके कारण छात्रों को भीड़भाड़ वाली जगहों पर बैठने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। स्कूलों की दयनीय स्थिति को सुधारने के लिए शिक्षक और प्रधानाध्यापक अब सीएसआर फंड और निजी दान पर निर्भर हैं। राज्य के कुछ जिलों में तो सुविधाएं उपलब्ध हैं, लेकिन अधिकांश जगह स्थिति काफी खराब है। यह समस्या सरकारी फैसलों और उनकी जमीनी स्तर पर खराब क्रियान्वयन के बीच की बड़ी खाई को दर्शाती है। शिक्षा विभाग के दावों के बावजूद स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव जारी है। छात्र और शिक्षक दोनों ही इस व्यवस्था से परेशान हैं क्योंकि प्रभावी शिक्षण के लिए आवश्यक माहौल नहीं मिल पा रहा है। सरकार को इस मामले में त्वरित हस्तक्षेप करने की आवश्यकता है ताकि बच्चों की पढ़ाई पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े।
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