छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दहेज प्रताड़ना और बहू को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपों में दोषी ठहराई गई एक सास को सभी आरोपों से बरी कर दिया है। अदालत ने निचली अदालत द्वारा 2010 में सुनाई गई 7 साल की सश्रम कारावास की सजा को रद्द कर दिया। मामला दुर्ग जिले का है, जहां 2006 में सोनल नाम की महिला की शादी के कुछ महीनों बाद संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। परिजनों ने आरोप लगाया था कि सास द्वारा दहेज को लेकर प्रताड़ना की गई थी। निचली अदालत ने 2010 में आरोपी सास को दोषी मानते हुए सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट में अपील के दौरान बचाव पक्ष ने साक्ष्यों और एफआईआर में देरी को लेकर सवाल उठाए। अदालत ने पाया कि मेडिकल रिकॉर्ड में शुरू में बाथरूम में गिरने का उल्लेख था। गवाहों के बयानों से दहेज प्रताड़ना का ठोस प्रमाण नहीं मिला। हाईकोर्ट ने कहा कि मौत से ठीक पहले क्रूरता या दहेज मांग साबित करना आवश्यक है। अदालत ने माना कि निचली अदालत ने साक्ष्यों का उचित मूल्यांकन नहीं किया। इसके आधार पर हाईकोर्ट ने दोषसिद्धि को गलत ठहराते हुए आदेश निरस्त कर दिया।
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