मेट्रो स्टेशनों के पास सार्वजनिक पार्किंग स्थलों को विकसित करने की योजना एक साल पुराना सर्वे होने के बाद भी रफ्तार नहीं पकड़ पाई है। प्रशासन ने पिछले साल यात्रियों की सुविधा के लिए स्टेशनों के आस-पास खाली जमीनों को चिन्हित करने का एक बड़ा सर्वे कराया था। इस सर्वे का मुख्य उद्देश्य मेट्रो स्टेशनों के पास वाहनों की बेतरतीब पार्किंग को रोकना और जाम की समस्या को खत्म करना था। जमीन चिन्हित होने के बाद भी धरातल पर अब तक पार्किंग स्थलों के निर्माण का काम शुरू नहीं हो सका है। इसके चलते रोजाना मेट्रो से सफर करने वाले हजारों यात्रियों को अपने वाहन सुरक्षित खड़े करने के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ रही है। उचित पार्किंग स्पेस न होने के कारण लोग सड़कों के किनारे ही वाहन खड़े करने को मजबूर हैं, जिससे मुख्य रास्तों पर जाम लग रहा है। अधिकारियों के मुताबिक कागजी कार्रवाई और एनओसी मिलने में हो रही देरी के कारण इस परियोजना की रफ्तार धीमी पड़ी है। विभिन्न सरकारी विभागों के बीच आपसी तालमेल की कमी को भी इस काम में आ रही रुकावट की एक बड़ी वजह माना जा रहा है। स्थानीय निवासियों और यात्रियों का कहना है कि प्रशासन की इस सुस्ती का खामियाजा उन्हें हर दिन ट्रैफिक जाम और सुरक्षा के रिस्क के रूप में भुगतना पड़ रहा है। पार्किंग विवादों के चलते मेट्रो स्टेशनों के बाहर आए दिन नोकझोंक और विवाद की स्थितियां भी पैदा हो रही हैं। मेट्रो फीडर बसों और ऑटो चालकों के लिए भी व्यवस्थित स्टैंड न होने से स्टेशनों के मुख्य द्वारों पर हमेशा अव्यवस्था का माहौल बना रहता है। इस देरी के कारण योजना की अनुमानित लागत में भी बढ़ोतरी होने की आशंका जताई जा रही है। यात्रियों ने मांग की है कि प्रशासन को इस जनहित के मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए तुरंत पार्किंग निर्माण कार्य शुरू करवाना चाहिए।
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