रायपुर में भारतमाला परियोजना से जुड़े भूमि अधिग्रहण मुआवजे के मामले में बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है। जांच में मुआवजा वितरण में कथित अनियमितताओं और संगठित फर्जीवाड़े के संकेत मिले हैं। आरोप है कि नायकबांधा समेत चार गांवों में एक परिवार को मात्र आधा हेक्टेयर भूमि के बदले 15 करोड़ रुपये से अधिक का मुआवजा जारी किया गया। मामले ने प्रशासनिक और जांच एजेंसियों का ध्यान आकर्षित किया है। प्रारंभिक जांच में दस्तावेजों और भुगतान प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ियों की आशंका जताई गई है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए आरोपी जयप्रकाश गांधी को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी के बाद उन्हें न्यायिक प्रक्रिया के तहत जेल भेज दिया गया। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि मुआवजा स्वीकृति और भुगतान में किन-किन लोगों की भूमिका रही। मामले में सरकारी अधिकारियों और अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। भारतमाला परियोजना देश की महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना योजनाओं में शामिल है। ऐसे में इस तरह के आरोपों ने परियोजना से जुड़े मुआवजा तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच आगे बढ़ने के साथ और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। प्रशासन का कहना है कि दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
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