महाराष्ट्र राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। आयोग ने एक नेत्र सर्जन को मरीज से ऑपरेशन से पहले ‘सूचित सहमति’ (informed consent) न लेने का दोषी पाया है। मामले में कहा गया कि सर्जरी से पहले मरीज को प्रक्रिया और जोखिमों की पूरी जानकारी नहीं दी गई थी। इस लापरवाही को उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन माना गया। आयोग ने चिकित्सक पर 7.5 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। यह राशि मरीज को हुए मानसिक और शारीरिक नुकसान के लिए तय की गई है। आयोग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि चिकित्सा प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और सहमति अनिवार्य है। इस फैसले को मेडिकल क्षेत्र में उपभोक्ता अधिकारों की मजबूती के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह निर्णय डॉक्टरों के लिए महत्वपूर्ण संदेश देता है। आगे ऐसे मामलों में मरीज की सहमति को और गंभीरता से लिया जाएगा।
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