आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि एकल मां बिना पिता की सहमति के नाबालिग बच्चे का पासपोर्ट प्राप्त कर सकती है, बशर्ते कोई अदालती रोक मौजूद न हो। याचिका में एक तलाकशुदा मां ने पासपोर्ट जारी करने से इनकार करने को चुनौती दी थी। क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय ने याचिका का विरोध करते हुए तर्क दिया कि नाबालिग बच्चे के पासपोर्ट के लिए आमतौर पर माता-पिता दोनों की सहमति आवश्यक होती है। हालांकि, न्यायालय ने कहा कि यदि पिता की कोई हिरासत नहीं है या अदालत ने उसे अधिकार नहीं दिया है, तो उसकी अनुपस्थिति में केवल मां की सहमति पर्याप्त है। अदालत ने स्पष्ट किया कि पासपोर्ट नियमों का उद्देश्य बच्चे के हितों की रक्षा करना है, न कि अनावश्यक बाधाएं खड़ी करना। न्यायाधीश ने कहा कि अगर पिता के अधिकारों पर कोई अदालती प्रतिबंध नहीं है, तो मां बच्चे का कानूनी अभिभावक होती है। इस फैसले से कई एकल माताओं को राहत मिलेगी जो बिना पिता के सहयोग के पासपोर्ट के लिए संघर्ष करती थीं। अदालत ने पासपोर्ट कार्यालय को निर्देश दिया कि वह मां के आवेदन पर पुनर्विचार करे और आवश्यक कार्रवाई करे। यह निर्णय माता-पिता के अधिकारों और बच्चे की भलाई के बीच संतुलन बनाता है। अदालत ने यह भी कहा कि इस नियम का दुरुपयोग रोकने के लिए मां को एक हलफनामा देना होगा कि पिता की ओर से कोई रुकावट नहीं है। कुल मिलाकर, यह फैसला एकल अभिभावकों के अधिकारों को मजबूत करने वाला माना जा रहा है।
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