मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बाल विवाह की शिकार एक महिला के पक्ष में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। महिला की शादी मात्र 13 वर्ष की उम्र में कर दी गई थी। अदालत ने उसके मासिक भरण-पोषण की राशि 2,000 रुपये से बढ़ाकर 6,000 रुपये कर दी। न्यायालय ने कहा कि इतनी कम राशि वर्तमान परिस्थितियों में उचित नहीं ठहराई जा सकती। कोर्ट ने निचली अदालत के आदेश पर असंतोष व्यक्त किया। फैसले में कहा गया कि पीड़िता को दोहरा अन्याय झेलना पड़ा। पहला अन्याय बाल विवाह के रूप में हुआ और दूसरा अपर्याप्त न्यायिक राहत के कारण। अदालत ने माना कि बाल विवाह से महिलाओं के जीवन पर गंभीर और दीर्घकालिक प्रभाव पड़ते हैं। न्यायालय ने ऐसे विवाह कराने वाले माता-पिता और अभिभावकों की जिम्मेदारी पर भी टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि समाज को इस कुप्रथा के प्रति अधिक संवेदनशील होने की आवश्यकता है। बढ़ी हुई भरण-पोषण राशि का उद्देश्य पीड़िता को बेहतर आर्थिक सहारा प्रदान करना है। इस फैसले को महिलाओं और बाल विवाह पीड़ितों के अधिकारों की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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