मेनोपॉज़ महिलाओं के जीवन का एक पूरी तरह से प्राकृतिक और सामान्य चरण है। इसके बावजूद, सामाजिक वर्जनाओं और झिझक के कारण इस विषय पर बात करना अभी भी वर्जित माना जाता है। इस दौरान महिलाओं को गर्मी की लहरें, मूड स्विंग, नींद न आना और कई अन्य शारीरिक व मानसिक बदलावों का सामना करना पड़ता है। समाज में इस मुद्दे को छुपाकर रखने से कई महिलाएं इन लक्षणों को समझ नहीं पातीं। खुलकर बातचीत से महिलाओं तक सही जानकारी पहुंच सकती है और उन्हें आश्वस्त किया जा सकता है। जागरूकता से वे इस संक्रमण काल में डॉक्टर की मदद लेने में झिझक महसूस नहीं करेंगी। इसलिए यह जरूरी है कि परिवार, कार्यस्थल और समाज में मेनोपॉज़ पर बिना किसी शर्म या डर के चर्चा की जाए। यह न केवल महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए बल्कि पूरे समुदाय की भलाई के लिए भी आवश्यक है। मेनोपॉज़ को सामान्य बनाकर हम एक स्वस्थ और सहयोगी माहौल बना सकते हैं।
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