तृणमूल कांग्रेस में अंदरूनी बगावत के समाचारों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। करीब 50 विधायकों के अलग गुट बनाने की चर्चाओं ने ममता बनर्जी के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। हालांकि भारतीय राजनीति में पार्टी टूटना कोई नई बात नहीं है। शिवसेना, एलजेपी और एनसीपी पिछले कुछ वर्षों में हुई बड़ी बगावतों के कारण टूट चुकी हैं। शिवसेना में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में बगावत हुई, जिससे पार्टी दो फाड़ हो गई। एलजेपी में चिराग पासवान बनाम अखिलेश यादव का विवाद भी पार्टी टूटने का कारण बना। एनसीपी में अजित पवार के नेतृत्व में बगावत ने शरद पवार की पार्टी को चीर दिया। इन मामलों में विद्रोहियों को चुनाव आयोग ने अक्सर मूल पार्टी के रूप में मान्यता दे दी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बगावतें आमतौर पर नेतृत्व, सीट बंटवारे और सत्ता की भूख से उपजती हैं। TMC में यह घटनाक्रम देखना दिलचस्प होगा कि क्या ममता बनर्जी अपने गढ़ में विद्रोहियों को काबू कर पाती हैं।
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