डायबिटीज की पहचान अब सिर्फ ब्लड शुगर टेस्ट तक सीमित नहीं रह गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि कई ऐसे संकेत और मार्कर होते हैं जो सामान्य जांच में पकड़ में नहीं आते। इनमें शरीर में जमा विसरल फैट, लिपिड प्रोफाइल में बदलाव और कुछ जेनेटिक संकेत शामिल हैं। मेडिकल साइंस में डायग्नोसिस के नए तरीकों के कारण अब बीमारी को पहले चरण में पहचानने पर जोर दिया जा रहा है। कई मामलों में मरीज का शुगर लेवल सामान्य दिख सकता है, लेकिन अंदरूनी मेटाबॉलिक बदलाव पहले से मौजूद होते हैं। ऐसे में अतिरिक्त टेस्टिंग से जोखिम का सही आकलन किया जा सकता है। डॉक्टरों के अनुसार समय रहते इन संकेतों की पहचान से गंभीर जटिलताओं को रोका जा सकता है। लाइफस्टाइल और फैमिली हिस्ट्री भी डायबिटीज के जोखिम को समझने में अहम भूमिका निभाते हैं। आधुनिक डायग्नोस्टिक तकनीकें अब बीमारी की गहराई से जांच करने में मदद कर रही हैं। इससे ट्रीटमेंट को और अधिक सटीक बनाया जा रहा है।
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