भारत में किशोर और युवा तेजी से सोशल मीडिया के जरिए अपनी पहचान और सीखने की प्रक्रिया को आकार दे रहे हैं। कोविड-19 महामारी के बाद इस प्रवृत्ति में और तेजी आई है। हालांकि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने कनेक्टिविटी और जानकारी तक पहुंच को आसान बनाया है, लेकिन इनके मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव को लेकर भी चिंताएं बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक उपयोग से लत लगने और दूसरों से तुलना करने की प्रवृत्ति बढ़ सकती है, जो आत्मसम्मान और मानसिक संतुलन को प्रभावित करती है। इसके अलावा, लंबे समय तक स्क्रीन टाइम का असर संज्ञानात्मक क्षमता पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञ संतुलित डिजिटल उपयोग और जागरूकता पर जोर दे रहे हैं। शिक्षा प्रणाली में डिजिटल व्यवहार को लेकर मार्गदर्शन देने की आवश्यकता बताई जा रही है। अभिभावकों और शिक्षकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यह विषय आज के युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी एक बड़ी सामाजिक चुनौती बनता जा रहा है। जिम्मेदार डिजिटल उपयोग को बढ़ावा देना समाधान का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
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