सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए कहा है कि विवाहित बेटियों को भी परिवार का सदस्य माना जाएगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि माता-पिता की सेवा के दौरान मृत्यु होने पर विवाहित बेटी अनुकंपा नियुक्ति या राशन दुकान आवंटन के लिए पात्र हो सकती है। न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार के उस आदेश को असंवैधानिक करार दिया जिसमें विवाहित बेटियों को परिवार की परिभाषा से बाहर रखा गया था। कोर्ट ने कहा कि ऐसा प्रावधान लैंगिक भेदभाव को बढ़ावा देता है। फैसले में समानता के संवैधानिक सिद्धांत पर विशेष जोर दिया गया। न्यायालय ने माना कि केवल विवाह के आधार पर बेटी को परिवार से अलग नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि यह सोच पुराने सामाजिक और लैंगिक रूढ़िवादों पर आधारित है। आधुनिक समाज में बेटियां भी माता-पिता की जिम्मेदारियों और अधिकारों से जुड़ी रहती हैं। इसलिए उन्हें अवसरों और लाभों से वंचित करना उचित नहीं है। कोर्ट ने राज्य की नीतियों को संविधान के अनुरूप बनाने की आवश्यकता बताई। यह फैसला महिलाओं के अधिकारों और समान अवसरों की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। निर्णय का प्रभाव अनुकंपा नियुक्ति और अन्य सरकारी लाभों से जुड़े मामलों पर पड़ सकता है।
Source: Source